कड़ा नियम
मंज़ूरी कौन देगा?
सिर्फ़ ERP में अधिकार वाले, अपने ही नंबर से। अपने आप मंज़ूरी कहीं नहीं।
VCS / ट्रांसपोर्ट ERP / AI डीज़ल ऐप
VCS ट्रांसपोर्ट ERP · AI डीज़ल और एडवांस ऐप
सबसे बड़ा खर्च, अब आपके कंट्रोल में। अपनी गाड़ियों वाले ट्रांसपोर्टर के लिए, आपके ERP से सीधा जुड़ा हुआ।
35 साल · 500+ ट्रांसपोर्टर
आपकी कितनी गाड़ियाँ हैं?
50 गाड़ियाँ, रोज़ एक गाड़ी में सिर्फ़ 5 लीटर का फ़र्क
₹7,12,500 हर महीने
(7 लाख 12 हज़ार)
पैसा कहाँ गया, पता नहीं।
📞 अपना हिसाब समझिए: कॉल करेंसिर्फ़ उदाहरण: ₹95 लीटर मानकर, 30 दिन। यह बचत का वादा नहीं।
AI डीज़ल और एडवांस ऐप अपनी गाड़ियों वाले ट्रांसपोर्टर के लिए है और आपके ERP से सीधा जुड़ा है। गाड़ी के आख़िरी 4 अंक से मोबाइल पर डीज़ल, एडवांस या CNG की पर्ची बनती है, हर पर्ची की अपने आप जाँच होती है, और मंज़ूरी WhatsApp पर आती है।
कैसे काम करता है
गाड़ी नंबर के आख़िरी 4 अंक। ट्रिप, क्लाइंट, रूट और ड्राइवर अपने आप।
डीज़ल, एडवांस या CNG चुनिए, फिर मीटर और पर्ची का फ़ोटो लीजिए।
मैसेज अधिकार वाले को जाता है। एक टच में मंज़ूर या रिजेक्ट।
सिस्टम यह भी बताता है कि गाड़ी को कितना डीज़ल चाहिए: रूट, एवरेज और पहले दिए डीज़ल से हिसाब लगाकर।
अपने आप जाँच
चेतावनी सीधे मंज़ूरी देने वाले को जाती है। कुछ छुपता नहीं।
आपके सवाल, जवाब के साथ
कड़ा नियम
सिर्फ़ ERP में अधिकार वाले, अपने ही नंबर से। अपने आप मंज़ूरी कहीं नहीं।
मंज़ूरी अटकती नहीं
15 मिनट में याद दिलाना, 30 मिनट में बैकअप अप्रूवर। गाड़ी पंप पर खड़ी नहीं रहती।
पूरी तरह ऑटोमैटिक
मंज़ूरी होते ही पंप, ड्राइवर और स्टाफ़ को अपने आप WhatsApp। किसी को फ़ोन नहीं।
एक बिल
मंज़ूर पर्चियाँ चुनिए, पंप का बिल नंबर और रकम डालिए, और एक डीज़ल बिल तैयार। जो पर्ची बिल हो चुकी, वह दोबारा नहीं आ सकती।
हर जगह चले
पर्ची फ़ोन में सेव होती है, और नेटवर्क आते ही चली जाती है।
हर कंपनी के लिए
छोटी कंपनी: मंज़ूरी बंद रखिए, पर्ची ही बिल। बड़ी कंपनी: ब्रांच वार अधिकार।
लाइव देखना है?
मुफ़्त डेमो में हम दिखाएँगे कि पर्ची कैसे बनती है, जँचती है और मंज़ूर होती है।
क्या बदलेगा
किसका फ़ायदा
सवाल-जवाब
AI डीज़ल और एडवांस ऐप अपनी गाड़ियों वाले ट्रांसपोर्टर के लिए है और आपके ERP से सीधा जुड़ा है। मोबाइल पर डीज़ल, एडवांस या CNG की पर्ची बनती है, हर पर्ची की अपने आप जाँच होती है, और मंज़ूरी WhatsApp पर आती है।
हर पर्ची मोबाइल पर मीटर और पर्ची के फ़ोटो के साथ बनाइए, हर पर्ची की अपने आप जाँच होने दीजिए, और मंज़ूरी WhatsApp पर दीजिए। AI डीज़ल ऐप यही करता है और आपके ERP से सीधा जुड़ा है।
लगभग नहीं। गाड़ी नंबर के आख़िरी 4 अंक डालिए, ट्रिप, क्लाइंट, रूट और ड्राइवर अपने आप आ जाते हैं।
सिस्टम उस गाड़ी के रूट, एवरेज और पहले दिए डीज़ल से हिसाब लगाकर बताता है कि अभी कितना लीटर चाहिए।
मंज़ूर पर्चियाँ चुनिए, पंप का बिल नंबर और रकम डालिए, और एक डीज़ल बिल तैयार। जो पर्ची बिल हो चुकी, वह दोबारा बिल में नहीं आ सकती।
सिर्फ़ ERP में अधिकार वाले। स्टाफ़ नंबर नहीं चुनता, बटन उन्हीं के अपने नंबर से चलते हैं, और अपने आप मंज़ूरी कहीं नहीं होती। रिजेक्ट पर कारण ज़रूरी है, और किसने कब क्या किया, सब रिकॉर्ड में रहता है।
15 मिनट में याद दिलाया जाता है, और 30 मिनट में मैसेज बैकअप अप्रूवर के पास जाता है, इसलिए गाड़ी पंप पर खड़ी नहीं रहती।
पर्ची फ़ोन में सेव होती है, और नेटवर्क आते ही चली जाती है।
मंज़ूरी बंद रख सकते हैं, पर्ची ही बिल बन जाएगी। बड़ी कंपनी ब्रांच वार अधिकार दे सकती है।
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